Swet Pradar Ke lakshan or ayurvedic easy upay

Swet Pradar Ke lakshan or ayurvedic upay Top 10 Useful

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Swet Pradar Ke  lakshan or ayurvedic upay : श्वेत प्रदर के लक्षण और आयुर्वेदिक उपाय

Swet Pradar Ke lakshan or ayurvedic easy upay
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Swet Pradar ke karan  : श्वेत प्रदर के कारण :-

  1. स्त्रियां अधिकतर खान-पान में बदपरहेजी करती हैं तथा चटपटी व तेज मिर्च-मसालों वाली खट्टी-मीठी चीजों का सेवन अधिक करती है क्योंकि उन्हें हरी सब्जियां व पौष्टिक संतुलित भोजन अच्छा नहीं लगता। इसके अलावा स्त्रियां घर-ग्रहस्थी के बढते हुए खर्च व पारिवारिक जिम्मेदारियों की चिन्ता भी पुरूषों से ज्यादा करती हैं। जिससे वे हर दम तनावग्रस्त रहती हैं। इस तरह का मानसिक तनाव भी प्रदर रोग पैदा करता है।
  2. प्रदर रोग का मूल कारण तो गुप्तांगों की गन्दगी का संक्रमण बदपरहेजी तथा चिन्ता ग्रस्त वातावरण में रहना होता है। कई बार यह रोग उन स्त्रियों को भी हो जाता है जिन्हें सहवास के समय अपने पति की कमजोरी के कारण पूरी संतुष्टि नहीं मिलती और उनका पति झटपट अपना काम निबटाकर करवट बदलकर सो जाता है, ऐसी स्थिति में स्त्री को काफी देर तक बेचैनी व मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। यही बेचैनी व तनाव स्त्री को प्रदर रोग से पीड़ित बना देता है।
  3. अत्यधिक उपवास, उत्तेजक कल्पनाएं, अश्लील वार्तालाप, सम्भोग में उल्टे आसनो का प्रयोग करना, सम्भोग काल में अत्यधिक घर्षण युक्त आघात, रोगग्रस्त पुरुष के साथ सहवास आदि भी इस रोग के मुख्य कारण हैं।

श्वेत प्रदर के लक्षण :  Swet Pradar Ke  lakshan:

  1. इस स्राव में बेहद बदबू होती है तथा कभी-कभी यह गाढ़ा लाल व मवाद जैसा पीला आने लगता है जिससे स्त्री के योनि मार्ग में जलन-खुजली व सूजन की शिकायत बन जाती है तथा सैक्स के समय भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
  2. इस स्राव में बेहद बदबू होती है तथा कभी-कभी यह गाढ़ा लाल व मवाद जैसा पीला आने लगता है जिससे स्त्री के योनि मार्ग में जलन-खुजली व सूजन की शिकायत बन जाती है तथा सैक्स के समय भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
  3. इस स्राव में बेहद बदबू होती है तथा कभी-कभी यह गाढ़ा लाल व मवाद जैसा पीला आने लगता है जिससे स्त्री के योनि मार्ग में जलन-खुजली व सूजन की शिकायत बन जाती है तथा सैक्स के समय भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है।

श्वेत प्रदर के उपाय  – Swet pradar ke upay:

  1. Swet pradar में पहले तीन दिन तक अरण्डी का 1-1 चम्मच तेल पीने के बाद औषध आरंभ करने पर लाभ होगा। श्वेतप्रदर के रोगी को सख्ती से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
  2. आँवला – मिश्री के 2 से 5 ग्राम चूर्ण के सेवन से अथवा चावल के धोवन में जीरा और मिश्री के आधा-आधा तोला चूर्ण का सेवन करने से लाभ होता है।
  3. पलाश (टेसू) के 10 से 15 फूल को 100 से 200 मि.ली. पानी में भिगोकर उसका पानी पीने से अथवा गुलाब के 5 ताजे फूलों को सुबह-शाम मिश्री के साथ खाकर ऊपर से गाय का दूध पीने से प्रदर में लाभ होता है।
  4. बड़ की छाल का 50 मि.ली. काढ़ा बनाकर उसमें 2 ग्राम लोध्र चूर्ण डालकर पीने से लाभ होता है। इसी से योनि प्रक्षालन करना चाहिए।
  5. जामुन के पेड़ की जड़ों को चावल के मांड में घिसकर एक-एक चम्मच सुबह-शाम देने से स्त्रियों का पुराना प्रदर मिटता है।
  6. श्वेतप्रदर (Swet Pradar -ल्युकोरिया) में दारुहरिद्रा या दारुहल्दी चूर्ण को पुष्यानुग चूर्ण के साथ सममात्रा में 2.5 से 5 ग्राम की मात्रा में लेना लाभकारी होता है।
  7. अतिबला की जड़ को पीसकर चूर्ण बनाकर शहद के साथ 3 ग्राम की मात्रा में दूध में मिलाकर सेवन करने से श्वेतप्रदर में लाभ प्राप्त होता है।
  8. नीम की छाल और बबूल की छाल को समान मात्रा में मोटा-मोटा कूटकर, इसके चौथाई भाग का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम सेवन करने से श्वेतप्रदर में लाभ मिलता है।
  9. इसके अलावा मुलहठी को पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इसी चूर्ण को 1 ग्राम की मात्रा में लेकर पानी के साथ सुबह-शाम पीने से श्वेतप्रदर ( Swet Pradar ) की बीमारी नष्ट हो जाती है।

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